सनम-अरूण कुमार झा बिट्टू

कितने हंसी वादिया हैंकितने हंसी हैं नजारेतुम सामने मेरे बैठोभर लू मै प्यासी निगाहेंइन नैनो की गहराईया क्यासागर भी इसमे समाएहोठो की इन सुर्खियो सेफूलो ने रंगत चुराएये चुपके मुझे ताक जानाशरमा के नजरे झुकानाअदाए ये जालिम बडी़ हैंचेहरे पे जुल्फो का गिर आनाखुशबू बदन की तुम्हारेमेहकती मांग कर के गुलाबेंछू कर मैं यकी तो कर लू तुम हो पास या भ्रम हैं हमारेइतनी हसी एक तुम होंउस पर ये मुस्कान तुम्हारीतरसता हैं सारा जहॉं पर किस्मत हैं तुम हो हमारी हॉ किस्मत हैं तुम हो हमारी

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16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 30/06/2017
    • arun kumar jha 01/07/2017
  2. ANU MAHESHWARI 30/06/2017
    • arun kumar jha 01/07/2017
  3. madhu tiwari 30/06/2017
    • arun kumar jha 01/07/2017
  4. babucm 30/06/2017
    • arun kumar jha 01/07/2017
  5. SARVESH KUMAR MARUT 01/07/2017
    • arun kumar jha 01/07/2017
  6. डी. के. निवातिया 01/07/2017
  7. arun kumar jha 01/07/2017
  8. raquimali 02/07/2017
  9. arun kumar jha 02/07/2017
  10. Kajalsoni 03/07/2017
  11. arun kumar jha 05/07/2017

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