बारीस की पहली फुहार

मिट्टी की मोहक महक से मन मचल सा गया है,छोटी छोटी बूंदो से दिल चहक सा गया है |यादो की बगिया हरी हो गयी,बचपन की याद फिर से मुस्कुरा सी रही |कई माह बीते, साल बदले पर हर सालो की कहानी वही,मुस्कानो के साथ आती है वो पर बचपन की तरह हसाती नहीं ||

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6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 30/06/2017
  2. ajay921 ajay921 30/06/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 30/06/2017
  4. Kajalsoni 01/07/2017

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