दूर क्षितिज में ढूंढ रही हूँ

दूर क्षितिज में ढूंढ रही हूँअपने अनजाने प्रियतम कोदूर क्षितिज को देख रही हूँपाने विस्तार स्वयं काछाई घटाओ संगखेल रहा चाँद लुका छुपीदूर क्षितिज तक ले जायेगीबहते बहते नाव किनारेअम्बर का विस्तारसागर की गहराईलिए मन मेंबाहें फ़ैलाने को तैयारमेरा अनुपम उल्लासबरसने को रिमझिम तैयारराह दिखाता जलता दीपकसजल अहसास बन परछाई बढ़ रहास्वयम स्वयं को तोल रहामैं बढ़ती जातीनाविक मैंदूर क्षितिज जाना मुझको हैबोल अबोले लेकरप्रियतम से मिलना मुझको है [email protected]#सत्येंद्र कात्यायन

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей