माना मेरी ज़िन्दगी-1….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

माना मेरी ज़िन्दगी है तेरे करार में….लेकिन खुदा नहीं तू दुनियावी दयार में….कैसी हवा चली है के लुट गया चमन चमन….कफ़न तक भी खिंच गए मायावी बाज़ार में….उठी अंगुली कभी कलम हरेक ख्याल पे मगर…सरे आईना अक्स मेरा नहीं अपने आकार में….थी कत्ले साफगोई या खुद साजिशे शिकार…खंजर मिला न खूँ दिल ही के दयार में….‘चन्दर’ को दूं आवाज़ तो ‘बब्बू’ जवाब दे…..दोनों के दोनों लुट गए इश्क़ की बहार में….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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20 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  2. ANU MAHESHWARI 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  3. madhu tiwari 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  4. Shishir "Madhukar" 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  5. डी. के. निवातिया 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  6. ROHIT KUMAR TIWARI 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  7. arun kumar jha 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  8. Kajalsoni 28/06/2017
    • babucm 29/06/2017
  9. raquimali 29/06/2017
    • babucm 30/06/2017
  10. Meena Bhardwaj 02/07/2017
    • babucm 02/07/2017

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