अब तक वे एक नहीं हो पाए हैं…Raquim Ali

  1. आसमान, जमीन, सितारे, शय्यारे, सूरज, खलासमुन्दर, पहाड़, नदियां, झील, पानी, चाँद, हवा;जो सब ये चीजें आज मौजूद हैं,कभी तो पैदा किए गए होंगेकोई तो होगा जो इन्हें कन्ट्रोल करता होगा!

असंख्य आकाशीय पिंड- औरआकाशीय पिण्डों में, घूमते रहने की प्रवृत्तिअपने अक्ष पर नाचते रहने की प्रक्रियाये कभी तो पैदा किए गए होंगेइनकी अंतिम डोर कहीं तो होगीकोई तो होगा जो इन्हें कन्ट्रोल करता होगा!बादल, बारिश, हरियाली, पेंड़-पौधे,जानवर, मछलियां, चिड़ियां, मधुमक्खियांघोंसले, छत्ते, शहद बनाने के हुनरइनकी पैदाइशें, हरकतें, उपयोगिताएं-इनका कण्ट्रोल कहीं से होता होगा!साग-सब्जियां, जड़ी-बूटियांफल, फूल, मेवे, अनाज़ का ज़खीराइनमें स्वाद, खूबसूरती, महक, शिफातकीट जगत का साम्राज्य, बैक्टीरियाइनका भी कंट्रोलर तो कोई होगा!औरसबसे विचित्र-उत्त्पत्तिमानव की ‘जात’जो है खास पर खासइसको किसने पैदा कर डाला है-वो भी एक कतरे से, जो था नापाक?शायद, इसलिये कि जब अपने वजूद के बारे में सोचेतोकुछ ‘शर्म’ करे, इतराना बंद करे!हर किस्म की मोहब्बतेंसुख-दुःख की अनुभूतिस्वास्थ्य-रोग, जीवन-मरणइनका भी कोई नियंता तो होगा!अब सवाल यह है-इन तमाम, चीजों को बनाने के पीछेराज क्या है? उद्देश्य क्या है?इनको बनाने वाली हस्ती कौन है?अगरकोई हस्ती है, तो वह कितनी, महान होगी!कितनी शक्तिमान, होगी!हर चीज को जानने वाली, सुनने वाली,देखने वाली होगी!अकल्पनीय, अपरिमित होगी!उसका नाम क्या होगा-उसका नाम बाप-दादों से सभी ने सुना होगाउसका नाम किताबों में सभी ने पढ़ा होगा।मुख़्तलिफ़, जुबानों के मुख़्तलिफ़ इलाकों वालेमुख़्तलिफ़ नामों से उस नाम को पुकारते हैंअपनी-अपनी जुबानों में उसका बयान भी करते हैं।एक ने कहा ‘मैं सही तू गलत’उसने कहा ‘तू गलत, मैं सही’वे मूल बात तो भूल गए, औरों को दरकिनार करने लगे।ये नादान हैं जो, ‘नाम’ को ही लेकर लड़ने लगे।वे बेचारेवे बेचारे ही तो हैं, उसके ‘नाम’ परजो नफ़रतें फैलाते हैं, इतनी महान हस्ती के ‘नाम’ परकुछ भी नहीं ‘समझ’ पाते हैं?वे बेचारे, खुद को बहुत बड़ा ज्ञानी समझते हैंबेचारे वे, लड़-झगड़ कर जिंदगी काट ले जाते हैंवे बेचारे, मरते-मरतेअपने, आने वाली औलादों में दुश्मनी के बीजबो जाते हैं।******************************भाग -2’उस महान हस्ती, सर्वशक्तिमान को कैसे अपना बना लिया जाएउसे दूसरे मत वाला न पा जाएअब उसको खुश कैसे किया जाएउसकी पूजा कैसे की जाएपूजा घर कैसे बनाया जाए, कैसे सजाया जाएउसकी इबादत के क्या हों तरीके?मरने के बादकैसे उसकी बनाई हुई जन्नत मुझे ही मिल जाएकहीं दूसरे तरह का ख्याल वाला न पा जाए!’इन बातों को लेकर लोगों को एक दूसरे से दूर किया जाता हैउनको आपस में मिलने-जुलने नहीं दिया जाता हैसमाज को बुरी तरीके से बाँट दिया जाता हैअब दंगे फसाद, लूट-खसोट, खून-ख़राबे कादौर शुरू किया जाता है।ऐसा दौर जो पीढियां दर पीढियां चलता रहता है,इंसानी शक्ल को शैतान के रूप, में ढालता रहता है!सदियों से बहुत से लोग,शेखियां तो बहुत ही बघारते रहे हैं, सच तो यह है-‘उस अज़ीम हस्ती’ को अभी तक पहचान नहीं पाए हैंइसीलिए, तरह-तरह के पाप में मुब्तिला हैं; जकड़े हैंजुदा-जुदा जीते हैं, अब तक वे एक नहीं हो पाए हैं।(शय्यारे= उल्का पिण्ड, खला =अंतरिक्ष, शिफात= रोग-मुक्त करने का गुण, मुख़्तलिफ़= विभिन्न,अज़ीम= अत्यंत महान, मुब्तिला=शामिल)…र.अ. bsnl

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12 Comments

  1. raquimali 25/06/2017
  2. kiran kapur gulati 26/06/2017
  3. kiran kapur gulati 26/06/2017
  4. ANU MAHESHWARI 26/06/2017
  5. Shishir "Madhukar" 26/06/2017
  6. डी. के. निवातिया 26/06/2017
  7. raquimali 26/06/2017
  8. babucm 26/06/2017
  9. Bindeshwar Prasad sharma 26/06/2017
  10. raquimali 26/06/2017
  11. Vivek Singh 28/06/2017
  12. raquimali 28/06/2017

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