“तुम” (2)

तुम्हारी मौजूदगी मेरे लिए‎ बड़े मायने रखती है जब तुम साथ होते हो तो मेरे संग घर कीखामोश दीवारें भी बोल उठती‎ हैं ।चंचलता की हदें तो तब टूट‎ती हैं जब समय पंख लगा कर उड़ता और नाचता सा भागने लगता है ।तुम्हारी गैर‎ मौजूदगी में आलसखामोशी की चादर घर और मन के कोनोंकी खूटियों पर टांग देता है ।तब समय थम सा जाता हैसन्नाटा पसर जाता है औरमन भी नीरवता में डूब जाता है ।XXXXX”मीना भारद्वाज”

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13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj 25/06/2017
  2. ANU MAHESHWARI 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj 25/06/2017
  3. babucm 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj 25/06/2017
  4. डी. के. निवातिया 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj 25/06/2017
  5. arun kumar jha 24/06/2017
    • Meena Bhardwaj 25/06/2017
  6. Kajalsoni 25/06/2017
  7. ALKA 26/08/2017

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