लिंग बदलो

बचपन में,बदल देता थातमाम लिंग।लड़का-लड़की,वचन भी बदल देता था,एक को बहुवचन में।मास्टर जी-सीखाते,लिंग वचन बदलोऔर झट से बदल देता था दुनिया के लिंग।अब जबबड़ा हो गया हूंएक लिंग भी नहीं बदल पाता।स्त्री लिंग-पुंलंग में-सीखी तालीम,सब गड़बडत्र हो गई।िंलंग बोध-गोया भूल सा गया हूं,सब के सब नपुंसक लिंग नजर आते हैं।

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9 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/06/2017
    • kprapanna 23/06/2017
  2. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 22/06/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 22/06/2017
  4. C.M. Sharma babucm 23/06/2017
  5. arun kumar jha arun kumar jha 23/06/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/06/2017
    • kprapanna 23/06/2017
  7. kprapanna 23/06/2017

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