हस्ताक्षर

कई बार रूलाते हैं अपने ही हस्ताक्षरकई बार हंसाते हैं,अब देखिएजब ज्वाईनिंग पत्र पर करते हैं हस्ताक्षरऔर जब…क्या ही मंजर होता है,जब अपने ही नाम डराते हैं कागजों पर पसरने के बाद।उन्होंने किए थेहस्ताक्षर और हो गयाएक बड़ा तक्सीमआ गए इस पार।हस्ताक्षर ही तो था,दोनों के बीच,तय करती सीमाएं,चीखेंरातों रात बंट गई थींदो अलग जमीन पर।हस्ताक्षर ही तो होते हैंजो दोनों को मिलती हैंऔर वो भी तो हस्ताक्षर ही होता हैजब मंजर ही कुछ और होताहस्ताक्षर में क्या रखा,

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6 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 19/06/2017
  2. C.M. Sharma babucm 20/06/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/06/2017
  4. kaushlendra 20/06/2017
  5. शैलजा 24/11/2017

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