प्रतिमा-बुत्त…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मैं हर शाम उसको देखने को बेचैन सा हो जाता था….ना जाने उसकी सूरत में क्या कशिश थी….देह रंग संगमरमरी था उसका….पर उस से ज्यादा लिबास के रंगों का चयन….उनको सलीके से पहनने की कला….फिर चेहरे पे नूर के साथ प्यारी सी मुस्कान….बिलकुल ऐसे जैसे एक देवी प्रतिमा हो….सजीव…पवित्र प्रतिमा….जिस को देखने को रूह करे…और सर सजदे में झुक जाए…पर हमें निर्जीव बुत्तों की पूजा करने की आदत है….और फिर…ना जाने उस प्रतिमा को किसी ने खंडित कर दिया…उसकी सुंदरता ही उसकी जैसे दुश्मन बन गयी….सजीव…पवित्र प्रतिमा….संगमरमरी बुत्त बन गयी…सिर्फ बुत्त…..\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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16 Comments

  1. Madhu tiwari 17/06/2017
    • babucm 19/06/2017
  2. ANU MAHESHWARI 17/06/2017
    • babucm 19/06/2017
    • babucm 19/06/2017
  3. Shishir "Madhukar" 17/06/2017
    • babucm 19/06/2017
  4. डी. के. निवातिया 17/06/2017
    • babucm 19/06/2017
  5. arun kumar jha 17/06/2017
    • babucm 19/06/2017
  6. Bindeshwar Prasad sharma 17/06/2017
    • babucm 19/06/2017
  7. Meena Bhardwaj 18/06/2017
    • babucm 19/06/2017

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