हम” बन जाए – अनु महेश्वरी

कुछ भी कहने से क्यों लगने लगा है, डर अब,इतना फ़ासला आ गया, या मन का है, बहम,कभी हम साथ हुआ करते थे हर सोच में, भी,आज, लगती है दूरियां क्यों, ख़यालात में भी,कहाँ से आ, पसर गया सन्नाटा अपने बीच में,हम अब पहले की तरह क्यों नहीं चहक पाते,बदल गयी है तेरी ख्वाहिशें या फिर मेरी राहें?या फिर बदल गया है, सारा ज़माना ही अब?पर कुछ तो है, जो आज भी तो, जोड़े है, मन,तेरी आवाज़ सुनते ही कानों में बजता है संगीत,अब भी है, अपने अंदर जुड़ने की, एक कशिश,काश फिर से तू अपनी हर एक समस्या लेकर,आए पास, पहले की तरह मिलके हल निकाले,और मै भी हर मसला सुलझाने में लूँ तेरी मदद,आओ, तू और मै से, निकले बाहर हम फिर से,और एकबार ‘हम’ बन जाए, हम दोनों फिर से| अनु महेश्वरीचेन्नई

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16 Comments

    • ANU MAHESHWARI 15/06/2017
  1. Meena Bhardwaj 15/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 15/06/2017
  2. Madhu tiwari 15/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/06/2017
  3. Shishir "Madhukar" 15/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/06/2017
  4. arun kumar jha 15/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/06/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 15/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/06/2017
  6. डी. के. निवातिया 16/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/06/2017
  7. babucm 16/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/06/2017

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