‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद…Raquim Ali

(‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद)भाग-2(07.06.2017) कुछ दिनों बाद: वो बुलबुल फिर से खाली पड़े कमरे में आने लगी थीपुराने घोंसले पर बैठ जाती मन को मेरे भाने लगी थी।(08.06.2017):अगले दिन देखा तो घोंसले को नये तिनकों से सजाया गया थादूसरे दिन देखा तो और भी सलीके से नीड़ को बनाया गया था।(11.06.2017):तीन दिन बाद मैंने हिम्मत दिखाई और उचककर, झांक ही लिया थाघोंसले के अंदर एक गहरा भूरा अंडा दिखाई दिया था।(12.06.2017):चौथे रोज़, रात दस बजे एक अजीब वाकया पेश आने लगा था :हम दोनों लोगों के इर्द-गिर्द बैठने लगी, जाने क्या उसको हुआ थाहमने पानी-चारा उसके सामने पेश किया, मगर उसने नहीं छुआ था।हर कमरे, हाल, किचेन में वह चक्कर लगाने लगी थीअब हमें किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी थी-कहीं उसके अंडे को किसी छिपकली या बिल्ली ने खा तो नहीं लिया थाफिर मैंने हिम्मत दिखाई, उचककर उसके घोंसले में झांक ही लिया था-अब तो वहां दो अंडे मौजूद मिले थेमानो दो मोती हों, या फूल खिले थे।बुलबुल, आधे घंटे बाद कहीं चली गई थीसमझ न सके, हमसे वह क्या कह रही थी?शायद उसने कहा हो-‘अपने घोंसले और अण्डे आप के हवाले छोड़ कर सुबह तक के लिए मैं कहीं जा रही हूँ अभी उड़ कर।'(13.06.2017) अगली सुबह देखा तो घोंसले पर बैठी हुई थी। आज 14.06.2017 को देखा तो 3 अंडे मौजूद हैं।तमन्ना है मेरी, दुआ है मेरी, अण्डों से बच्चे हो सकें।सभी बच्चे, सलामत रहें, और घोंसले से उड़ सकें। एक बार और, आप भी दुआ करें, हम भी दुआ करें। ।आमीन। … र.अ. bsnl

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12 Comments

  1. डी. के. निवातिया 14/06/2017
  2. SARVESH KUMAR MARUT 14/06/2017
  3. Shishir "Madhukar" 14/06/2017
  4. babucm 14/06/2017
  5. Kajalsoni 14/06/2017
  6. Madhu tiwari 14/06/2017
  7. ANU MAHESHWARI 14/06/2017
  8. raquimali 15/06/2017
  9. raquimali 15/06/2017
  10. arun kumar jha 15/06/2017
  11. raquimali 17/06/2017

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