अब तुम्हें अपनी तक़दीर लिखनी है – अनु महेश्वरी

खुद जैसी नज़र से, देखोगे,दुनिया भी वैसी ही, दिखेगी,दिल से भलाई अगर करोगे,तुम्हें भी अच्छाई ही मिलेगी|फिर से न कहना, मेरे साथ ही, ऐसा क्यों होता है|अपने ही हाथो, अब तुम्हें अपनी तक़दीर लिखनी है|औरो का दर्द हो महसूस, ऐसा जीवन हो,दुसरो को न दे घाव, ऐसी अपनी सोच हो,सबका भला सोचे, मन इतना पावन हो,ऊंचनीच मिटा सके, दिल इतना साफ़ हो|फिर से न कहना, मेरे साथ ही, ऐसा क्यों होता है|अपने ही हाथो, अब तुम्हें अपनी तक़दीर लिखनी है|शर्म आँखों में हो, जरुरत परे, ज्वालामुखी तुम बनो,बोली मधुर हो, पर अन्याय का विरोध भी, तुम करो,इरादे चट्टान से हो, पर सबको साथ लेकर चल सको,श्रम भी जीवन में हो, पर कभी, गलत बात पे न झुको|फिर से न कहना, मेरे साथ ही ऐसा, क्यों होता है|अपने ही हाथो, अब तुम्हें अपनी तक़दीर लिखनी है| अनु महेश्वरीचेन्नई

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24 Comments

  1. Madhu tiwari 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  2. Meena Bhardwaj 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  3. डी. के. निवातिया 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  4. Shishir "Madhukar" 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  5. bindeshwar prasad sharma 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  6. SARVESH KUMAR MARUT 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  7. arun kumar jha 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  8. babucm 13/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 13/06/2017
  9. Ram Gopal Sankhla 14/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 14/06/2017
  10. raquimali 14/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 14/06/2017
  11. Kajalsoni 14/06/2017
    • ANU MAHESHWARI 14/06/2017

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