मुस्कुराहट…Raquim Ali

मुस्कुराहट1. अपनों की: देखीं, ख़ुशी की कभी शरारत की मुस्कुराहटें। ममता भरी जो मुस्कराहटें थीं अभी याद हैं। डांट से युक्त वालिद की मुस्कानें लाज़वाब थीं।……………………….2. अपनी: मंद-मंद सी तबस्सुम थी एक मेरे होंठों पे;लिए हुए, वोगहराई का दर्दआई होंठों पे; मुस्कुराहट…. ग़म छुपाना चाही थी वो ऐसी भी।**************3. दूसरों की:मुस्कुराहटेंनफ़रत में सनीकभी दिखी थीं। कभी-कभार मुस्कानें रंज़ीदगी में डूबी दिखीं।वे मुस्कानें भीथीं जो धूर्तता भरी मैंने देखी थीं। ‘ग़ज़ब’ ढातीं मुस्कानें कभी-कभी दिख ही गईं।….र.अ. bsnl

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11 Comments

  1. raquimali raquimali 13/06/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/06/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/06/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/06/2017
  5. SARVESH KUMAR MARUT SARVESH KUMAR MARUT 13/06/2017
  6. C.M. Sharma babucm 13/06/2017
  7. raquimali raquimali 14/06/2017
  8. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/06/2017
  9. raquimali raquimali 15/06/2017
  10. kiran kapur gulati Kiran Kapur gulati 10/08/2019

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