मेरे आने का मकसद !!

मेरे आने का मकसद !!कितनी सुन्दर रचना है यह प्यारा संसार भेजा है मकसद से हम सबको उसने इस पार पर ना जाने क्या हो गया है मानव इस मायावी दुनिया में खो गया है दिखाई देता है तो बस दूर दूर तक नफरत , द्वेष और भृष्टाचार का कला बाजार बंधी है आंख पर ऐंसी महीन पट्टी, देखता है मानव सब कुछ फिर भी बना है अनजान ना जाने किस दौड़ में लगा जा रहा है , और कर रहा है अपने ही अस्तित्व का विनाश भूल गया है मकसद आने का इस पार सूखने लगे हैं अब तो प्राण मेरे, देख कर यह सब हाहाकार कभी विघ्नित, कभी हो जाता हूँ मैं चिंतित, सुन कर यह चीख पुकार हूँ क्यों नहीं मैं औरो जैंसा – निर्मम, निर्लज, जो करता फिरुँ सब पर अत्याचार क्या मैं भी भूल गया हूँ मकसद आने का या फिर वो याद दिलता मुझको बार बार भेजा हैं उसने हम सबको करने सुशोभित यह सारा संसार हम हैं उसकी सबसे उत्तम रचना – याद हैं रखना हमको बार बार करने प्यार एक दूसरे से भेजा हैं उसने हमको इस पर भेजता हैं वो यही सन्देश हर प्राणी के हाथ बार बार By Anderyas

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11 Comments

  1. Anderyas 09/06/2017
  2. bindeshwar prasad sharma 09/06/2017
  3. babucm 09/06/2017
  4. ANU MAHESHWARI 09/06/2017
  5. Meena Bhardwaj 09/06/2017
  6. डी. के. निवातिया 09/06/2017
  7. Anderyas 09/06/2017
  8. madhu tiwari 09/06/2017
  9. arun kumar jha 09/06/2017
  10. Kajalsoni 10/06/2017
  11. SARVESH KUMAR MARUT 11/06/2017

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