नसीब की किताब….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

सपने सारे डूब गए मेरे आँखों के सैलाब में….रात जब वो मिले मुझे रकीब संग ख्वाब में….कुछ दुनिया का सितम कुछ खुदारी मेरी भी …बिक न सका मैं अपने ही ज़मीर के रुआब में…जन्नत या दोजख कौन जाने किस को क्या मिले है….रात भर यूं ही रहा परेशान मैं तेरे मेरे हिसाब में…दिल पे चोट खा के भी हम उफ्फ न कर सके…दर्द भी फिर छुप्प गया हंसी के नकाब में….भला था वो जो हक़ से दर्द दे गया तुझको “बब्बू”..वर्ना ये भी कहाँ लिखा था तेरे नसीब की किताब में…\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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24 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
      • Shishir "Madhukar" 09/06/2017
        • babucm 12/06/2017
  2. Kajalsoni 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  3. M Sarvadnya 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  4. ANU MAHESHWARI 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  5. Meena Bhardwaj 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  6. arun kumar jha 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  7. डी. के. निवातिया 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  8. madhu tiwari 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  9. डॉ. विवेक 08/06/2017
    • babucm 09/06/2017
  10. bindeshwar prasad sharma 09/06/2017
    • babucm 09/06/2017
    • babucm 12/06/2017

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