तिनकों से बने सपने

तिनकों से बने सपनेतिनकों से बने सपने तो ,हवा के हलके झोके से बिखर जाते हैं,आंधी तो आती है आशियाने उजाड़ने ,सर उठाकर खड़े पेड़ों को उखाड़ने ,जो जीवन भर की मेहनत से बनते हैं,जो वर्षों में सर उठाकर खड़े होते हैं ,इसीलिये हम रेत के महल नहीं बनाते ,तिनकों से सपने नहीं बुनते,खुली आँखों से,जीवन की मुश्किलों को,संघर्षों से गूंथते हैं,अरुण कान्त शुक्ला6/6/2017

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9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/06/2017
  2. Kajalsoni 08/06/2017
  3. C.M. Sharma babucm 08/06/2017
  4. arun kumar jha arun kumar jha 08/06/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/06/2017
  6. Madhu tiwari madhu tiwari 08/06/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 09/06/2017
  8. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 16/06/2017

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