ज़ालिम — डी के निवातिया

ज़ालिम

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बाँट दिया धर्म के नाम पर दुनिया को,अरे इंसानी फ़रिश्ते तेरी जात क्या है !मै तो निर्मल जर्रा हूँ माटी-ऐ-हिन्द कातू बता ज़ालिम तेरी औकात क्या है !!

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डी के निवातिया

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28 Comments

  1. Meena Bhardwaj 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  2. raquimali 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  3. madhu tiwari 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  4. Kajalsoni 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  6. Shishir "Madhukar" 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  7. डॉ. विवेक 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  8. arun kumar jha 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  9. Shyam 07/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  10. babucm 08/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  11. कमल "बिजनौरी" 08/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
    • डी. के. निवातिया 15/06/2017
  12. kiran kapur gulati 27/06/2017
    • डी. के. निवातिया 28/06/2017
  13. Vivek Singh 03/07/2017
  14. डी. के. निवातिया 03/07/2017

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