गीत – नेह का बंधन-शकुंतला तरार

गीत 17-05-17नेह का बंधनअक्षर-अक्षर रात लिखी और,शब्द-शब्द से दिन निखरे |नेह का बंधन ऐसा बंधन, सुख-दुःख की छाया में पले,जोड़-जोड़ कर सुख संजोया,फिर भी दुःख के साथ जगे|अक्षर-अक्षर रात लिखी और,शब्द-शब्द से दिन निखरे ||

1-मैंने मांगी थी जलधारा,मृगतृष्णा ने है भटकायाझरने लगे हैं आसमान से,अंगारों की कैसी मायाआँखों ओझल हुई चाँदनी,टिमटिम तारों से अगन झरे |अक्षर-अक्षर रात लिखी और,शब्द-शब्द से दिन निखरे ||2- आज लेखनी समझ न पाईक्यूँ सागर से है गहरी वहआज शब्द भी समझ न पाएक्यूँ अम्बर से ऊँचे हैं वहभाव-भावना के बिन साथीकोई कैसे परवान चढ़े |अक्षर-अक्षर रात लिखी और,शब्द-शब्द से दिन निखरे ||3-क्या पाया था और क्या खोयाक्या माँगा क्या लिया दियावर्तमान में क्या कुछ रखाभूतकाल ने भी क्या खोयाबिखरी यादें बिखरे सपनेआशाओं के साथ चले |अक्षर-अक्षर रात लिखी और,शब्द-शब्द से दिन निखरे ||शकुंतला तरार

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया 07/06/2017
  2. Meena Bhardwaj 07/06/2017
    • Meena Bhardwaj 07/06/2017
  3. madhu tiwari 07/06/2017
  4. Kajalsoni 07/06/2017
  5. Shishir "Madhukar" 07/06/2017
  6. डॉ. विवेक 07/06/2017
  7. babucm 08/06/2017

Leave a Reply