एक सजा,,,,

एक सजामन में छाया खुमार सीअपनी क़िस्मत तो बे-वफ़ा निकलीहर दिन तो था गमो का सायाहर शाम एक सजा निकली,,,,,,अभी तो वफ़ा के गुलसन से आयाइन फूलों के रंगों को साथ लायाअभी तो खुशियों के लिए दिल से दुआ निकलीऔर जिंदगी ही बे-वफ़ा निकली,,,,,,,न काम आई कोई दवान काम आई कोई दुआभटक रहा था बे-वज़हख़ुशी के सदके को छुपाताचाहा गमों को सदा,,,,,,,,,,,आँखों में जो भी था छुपा पायादिल के गमों को ना छुपा पायादिल के तले भटकता रहा ख़ुशी के लिएपर जिंदगी हि बददुआ निकलीहर दिन तो था गमों से यारानाहर शाम एक सजा निकली,,,,,,,!!!

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 03/06/2017
    • md. juber husain 01/09/2017
  2. डी. के. निवातिया 03/06/2017
    • md. juber husain 01/09/2017
  3. bindeshwar prasad sharma 03/06/2017
    • md. juber husain 01/09/2017
  4. Kajalsoni 03/06/2017
    • md. juber husain 01/09/2017
  5. MANOJ KUMAR 03/06/2017
    • md. juber husain 01/09/2017

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