ज़िन्दगी जब भी अपना पता देती है

ज़िन्दगी जब भी अपना पता देती है,ग़म कितने हैं यह बता देती है।सह भी लेते हैं लोग अक्सर इसको,फिर भी अक्सर रुला देती है।फ़िक्र जब बढ़ जाती हैं खुशियों को लेकर,तो हमारे जिस्म को काँटा बना देती है।वक्त गुजरता चला जाता है इस ज़िन्दगी में,कुछ मर जाते और कुछ बूढ़े हो जाते हैं।छोटे और बड़ो पर भी अपना जादू चला जाती है! सर्वेश कुमार मारुत

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16 Comments

  1. Ram Gopal Sankhla 02/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 02/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  3. arun kumar jha 02/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  4. Anu Maheshwari 02/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  5. Kajalsoni 02/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  6. Shishir "Madhukar" 03/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  7. डी. के. निवातिया 03/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017
  8. MANOJ KUMAR 03/06/2017
    • SARVESH KUMAR MARUT 03/06/2017

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