नागफनी के बीच गुलाब — डी के निवातिया

नागफनी के बीच गुलाब

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वो जो नागफनी के बीच गुलाब खिला है।मेरी पाक मुहब्बत का नायाब सिला है।।

अहसासों के मधुर पलो से सींचा है इसेतब जाकर कही दिल को सुकून मिला है !!

तुम्हारी नजर में भले ही ये एक फूल होमेरे जिस्म-ऐ-शहर का ये दुर्लभ किला है !!

कोशिश न करना तोड़ने की तुम इसकोजिसने भी डाला हाथ, लहूलुहान मिला है !!

बड़ी शिद्दत से संवारा है इस गुलशन कोइसे और सवरने दो, अभी ये अधखिला है !!

गुल तो बहुत से खिले होते है गुलशन में मुर्दा भी जिंदगी मांगे,  ये वो उर्मिला है !!

बद निगाहो से जो तांकता है ये ज़माना  “धर्म” को बस एक इस बात का गिला है !!!!!

डी के निवातिया

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उर्मिला – जुनून की लहर

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20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  2. Kajalsoni 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  3. Meena Bhardwaj 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  5. ANU MAHESHWARI 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  6. arun kumar jha 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  7. SARVESH KUMAR MARUT 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  8. madhu tiwari 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  9. MANOJ KUMAR 30/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017
  10. babucm 30/05/2017
    • डी. के. निवातिया 06/06/2017

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