विरोधाभास – अनु महेश्वरी

पत्थरों को, ईश्वर मान पूजा जाता है जहाँ,कभी कभी वही, जवानो पे भी, बरसते है|नौरात्र में कन्या की पूजा होती है जहाँ,वही कन्या भ्रूण की भी, हत्या होती है|आधी आबादी सामान्य सुविधा से वंचित है जहाँ,वही क्रिकेट में पानी की तरह पैसा बहाया जाता है|राष्ट्रहीत में भी नेतागन अलग राग अलापते है जहाँ,बस कुछ वोटों के लिए भड़काऊ भाषण भी दे जाते है|सबके समान अधिकार की बाते होती है जहाँ,चुनाव के वक़्त आरक्षण, एक बड़ा मुद्दा होता है|देवी के बहुत सारे मन्दिर है जहाँ,दहेज़ पे बहू की बलि, दे दी जाती है|माता-पिता को पूज्यनीय माना जाता है जहाँ,फिर भी वृद्धाश्रम हर शहर में, मिल ही जाते है|मै उसी भारत की रहने वाली हूँ, आज भी जहाँ,इन विरोधाभास के साथ मासूमियत भी रहती है| अनु महेश्वरीचेन्नई

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18 Comments

  1. Madhu tiwari 28/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" 28/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/05/2017
  3. arun kumar jha 28/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/05/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 28/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/05/2017
  5. MANOJ KUMAR 29/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 29/05/2017
  6. babucm 29/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 29/05/2017
  7. Kajalsoni 29/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 29/05/2017
  8. डी. के. निवातिया 29/05/2017
    • Anu Maheshwari 29/05/2017
  9. SARVESH KUMAR MARUT 29/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 29/05/2017

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