बदल गयी तुम

दोस्तों मेरी नयी कविता को पढ़े- :: :**: : शीर्षक-बदल गयी तुम::::::::::::**वक़्त की वजह से हुआया फितरत बदल गयी तुम्हारीएक पल ऐसा भी थाजब तुम मुझे देखे बिना रह नहीं पाती थीमेरे लिए फिक्रमंद हुआ करती थीजब कभी मैं नहीं होता तुम्हारे पासतुम बैचैन हो जाती थीबदहवास सी होकर मुझे ढूंढती रहती थीफिर कुछ हुआ ऐसाबदल गया वक़्त या बदल गयी तुमवक़्त के थपेड़ो में तुम खो सी गयीमेरा चेहरा तुम्हारे आँखों से ओझल हो गयातुमने अपना दायरा बदल लियामैं भी खुद को तुम्हारा बीता वक़्त मानअपनी जरूरतों में खुद को सिमटा लियाखैर कोई बात नहींचाहे बदल गया वक़्तया बदल गयी तुमतुम्हारी यादो के सहारे जीने की कोशिश करूँगातुम खुश रहो हमेशाबस यही दुआ करूँगाजब तुम्हे किसी मोड़ पर लगेकुछ छुट गया पीछेतब देख लेना अपनी आँखों कोऔर ढूंढ लेना मुझेमैं तब भी थाऔर आज भी हूँतुम्हारे आँखों मेंचाहे बदल गया वक़्त या बदल गयी तुम——#अभिषेक राजहंस

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7 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 28/05/2017
  2. Madhu tiwari 28/05/2017
  3. arun kumar jha 28/05/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 28/05/2017
  5. MANOJ KUMAR 29/05/2017
  6. Kajalsoni 29/05/2017
  7. डी. के. निवातिया 29/05/2017

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