प्रेम का अंकुर — डी के निवातिया

प्रेम का अंकुर

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परावर्तन के आईने में प्रेम का अंकुर उगाना है आत्मीय मिटटी में बोध का उर्वरक मिलाना है प्रेम रस से परिपूर्ण बन जायेगा ये फलित वृक्ष   तुम संग सिमट के छाया में जीवन लुटाना है !!!!!डी के निवातिया 

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24 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  2. md. juber husain 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  3. ANU MAHESHWARI 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  4. Kajalsoni 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  5. Madhu tiwari 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  6. MANOJ KUMAR 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  7. arun kumar jha 28/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  8. Meena Bhardwaj 28/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  9. babucm 28/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  10. Shyam 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017
  11. SARVESH KUMAR MARUT 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 05/06/2017

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