बचा ले तू अपनी सृष्टि – अनु महेश्वरी

तूने बनाई, भगवन इतनी सुन्दर दुनिया,रंग बिरंगे फूलों से महकाई तूने वादियाँ|कहीं पे है ऊँचे पर्वत,तो कहीं नीली झील,कहीं सागर का पानी गहरा,कहीं नदियों की अविरल बहती धारा|यहाँ कल कल करते बहते झरने भी,सुबह चमकती सूरज की किरणे भी|कहीं पे पत्थर कही पे कंकर,कहीं पे है समतल जमीं,और कहीं धूल सोने सी|दिखती नभ में, कभी इंद्रधनुष यहाँ,झिलमिल करते तारे, रात में जहाँ,शीतलता का प्रतीक, चाँद भी है वहाँभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों भी है यहाँ|फिर तूने, क्यों न अच्छा सा,माली भी एक बनाया?जो सम्भाल कर रखता इस धरा को,क्यों, अमानुष बना दिया, कुछ लोगो को?जो केवल अपने फ़ायदे की है सोचते,बस पैसे के पीछे यहाँ लोग है भागते,मानवता को रोज ही तार तार करते|आज सराफत की कीमत कहाँ,झूठ और फ़रेब खूब चलते यहाँ|कुछ भेड़िये हर गली में मिल ही जाते,मौका मिले, अपनों को भी नोच खाते|ख़तरा आतंकवाद से भी है जहाँ,अंदर घर के भी है, दुश्मन यहाँ|अब दिखा तू, कोई चमत्कार,सुदर्शन चक्र, अपना चला कर|बदलदे सबकी भ्रष्ट मती,भर, सब के अंदर सुबुद्धि,बचा ले तू, अपनी सृष्टि| अनु महेश्वरीचेन्नई

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18 Comments

  1. Meena Bhardwaj 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/05/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/05/2017
  3. डी. के. निवातिया 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/05/2017
  4. Kajalsoni 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/05/2017
  5. Shishir "Madhukar" 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/05/2017
  6. Madhu tiwari 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/05/2017
  7. MANOJ KUMAR 27/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/05/2017
  8. babucm 28/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 28/05/2017

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