शायरी-संग्रह:-विजय

1. छूट रहे हैं कुछ लोग,जुट रहे है कुछ लोग, कारवां हमारा यूँ ही बढता चला जा रहा है।

2. इश्क़ है खुदा को मुझसे,ऐसा मुझको लगता है खुशियाँ बांटी है सबको,पर गम मुझसे ही साझा किया है

3. अनबन हो गई है मुझको मेरे ही नसीब से,
गुम हो जाती है मंजिल आकर बहुत करीब से |

४. सारा जमाना हँसता है, देखकर मेरी हस्ती को रेतो पे चलाए जा रहा हूँ, जिन्दगी की अपनी कश्ती को ।

16 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 26/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017
  2. डी. के. निवातिया 26/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017
  3. Kajalsoni 26/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017
  4. Shishir "Madhukar" 26/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017
  5. Shishir "Madhukar" 26/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017
  6. babucm 26/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017
  7. MANOJ KUMAR 27/05/2017
    • vijaykr811 27/05/2017

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