दिल तो दिल है — डी के निवातिया

दिल तो दिल है

परिंदो पर बंदिश है उड़ने की, ड्योढ़ी पे ताला पड़ने वाला है जाने कौन बिजली गिरने वाली है, या बादल फटने वाला है !!

शहर की सड़को से आज फिर चहलकदमी नदारद है लगता है फिर कोई सिकंदर यहां से गुजरने वाला है !!

सपनो का सौदागर है वो खरीद फरोख्त में  बड़ा माहिर हैसंभलकर मिलाना नजरे, निगाहो से सुकून हरने वाला है !!

सुना है मुहब्बत में घायल है, फूलो के खंजर से वार करेगा      पत्थरो से टकराया है, हमारा दिल, कौन सा डरने वाला है !!

न पत्थर का है, न मोम का, न शीशे का, दिल तो दिल है धर्म का लहू बहता है ये कौन सा पानी से चलने वाला है !!

!!!डी के निवातिया

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26 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 25/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" 25/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  3. Meena Bhardwaj 25/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  4. Kajalsoni 25/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  5. anuj tiwari 25/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  6. babucm 26/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  7. babucm 26/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  8. Madhu tiwari 26/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  9. bindeshwar prasad sharma 26/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  10. MANOJ KUMAR 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  11. md. juber husain 27/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017
  12. Shyam 29/05/2017
    • डी. के. निवातिया 30/05/2017

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