मगर वह है कि नहीं आती… Raquim Ali

मगर वह है कि नहीं आतीअब आएगी, अब आएगी वह, सोचता रहता हूँ रोज़ सुबह से ही, उसका रास्ता ताकता रहता हूँ जब भी दिख जाती है वह, खुश हो जाता हूँ मैं;इंतजार करता रहता हूँ, पलकें बिछा के रखता हूँ और, अभी और क़रीब आ जाए, यही चाहता हूँ मगर वह है कि नहीं आती, आह-सी भरता हूँ मैं।:एक-डेढ़ माह पहले:एक कमज़ोर-सा घोंसला, खाली पड़े हुए कमरे में कोने के डंडे व झाड़ू के सहारे जो बनाया था उसनेगिर रहा था, संभाला, फिर मज़बूत बनाया था हमने;:इस के चार-पांच दिनों के बाद:शायद सुरक्षा चेक करने, साथी को संग लाई थी वहअब तो अपने घोंसले तक नहीं जाना चाहती है वहभावी अण्डों का है कोई दुश्मन, यूं समझती है वह!कभी-कभी आती है खिड़की पर, ग्रिल पर या डोर परमेरे घर के आस -पास रेलिंग पर या आम की डाल पर प्यारी सी बुलबुल सामने लॉन में या बिजली के तार पर; कितना सुकून मिल जाता मुझको, फुदक- फुदक कर एक बार फिर, मेरे घर के अंदर कमरे में वह आ जाती घोंसले पर आ कर बैठ जाती, उस पर जो, छा जाती!मगर वह है कि नहीं आती.. …र.अ. bsnl

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12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 25/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/05/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 25/05/2017
  4. Kajalsoni 25/05/2017
  5. Raquim Ali 25/05/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/05/2017
  7. C.M. Sharma babucm 26/05/2017
  8. Madhu tiwari Madhu tiwari 26/05/2017
  9. raquimali raquimali 26/05/2017
  10. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 27/05/2017
  11. Raquim Ali 27/05/2017

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