गजल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

 शिलशिला प्यार का चल रहा जमाने सेप्यार हो जाता बस रिश्ता एक बनाने से इसे खेल मल समझो बड़ी कयामत है येफलता और फूलता भी है यह निभाने से मेल और viswash दिल को जोड़ देता हैदिल घायल हो जाता नज़र मिलाने से तन्हा जिंदगी आप जीये भी तो क्या जीयेदोस्ती बन जाती है बस बात बनाने से दिल की बात मुहब्बत से जुबां पर लाइयेउजड़े चमन भी बस जाते हैं बसाने से बेवफाई इश्क में क्यों मजबूरियां बन जातीपागल क्यों हो जाती अपना दिल जलाने से प्यार हो सच्चा जैसे हीर और रांझे की जोड़ीशकून के फूल भी बरसेंगे बिन्दु याद आने से बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा  बिन्दु

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18 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 22/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
  2. babucm 22/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
  3. डी. के. निवातिया 22/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
  4. Meena Bhardwaj 22/05/2017
  5. bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
  6. MANOJ KUMAR 22/05/2017
  7. bindeshwar prasad sharma 22/05/2017
  8. arun kumar jha 22/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 23/05/2017
  9. Shishir "Madhukar" 23/05/2017
  10. bindeshwar prasad sharma 23/05/2017
  11. Madhu tiwari 23/05/2017
  12. bindeshwar prasad sharma 23/05/2017

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