“क्षणिकाएँ”

(1)कल के साथ जीना कोई बुराई नहीआज की नींव कल पर धरी है।आज की सीख कल काम आएगी फिरकल को छोड़ अधर-झूल में कैसे जीया जाए। (2)यादें और पतंग एक जैसी ही होती हैंडोर से टूट कर एक शाख पर अटकती है ,तो दूसरी दिल और दिमाग मे ।बस एक हल्का सा झोंका …..,औरहिलोर खा बैठी। (3) तारीफ भी अजीब‎ चीज हैइन्सान को चने के झाड़ पर चढ़ा देती है।उसका तो कुछ नही बिगड़ताशामत चने के झाड़ की आती है। ××××××× “मीना भारद्वाज”

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20 Comments

  1. Madhu tiwari 21/05/2017
    • Meena Bhardwaj 21/05/2017
  2. sarvesh kumar marut 21/05/2017
    • Meena Bhardwaj 22/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI 21/05/2017
    • Meena Bhardwaj 21/05/2017
  4. Shyam 21/05/2017
    • Meena Bhardwaj 21/05/2017
  5. Shishir "Madhukar" 21/05/2017
  6. Meena Bhardwaj 21/05/2017
  7. MANOJ KUMAR 21/05/2017
    • Meena Bhardwaj 21/05/2017
  8. Bindeshwar Prasad sharma 21/05/2017
    • Meena Bhardwaj 22/05/2017
  9. babucm 21/05/2017
    • Meena Bhardwaj 22/05/2017
    • Meena Bhardwaj 22/05/2017
  10. डी. के. निवातिया 22/05/2017
    • Meena Bhardwaj 22/05/2017

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