वह रे इंसान

जो करता है वही पाता है ।दुख में कोई काम नहीं आता है ।।पैसा ही नहीं सब कुछ । पैसे को तो इंसान ही बनाता है।।आत्मा को कोई नहीं त्याग सकता।आत्मा खुद शरीर को त्याग जाती है।।झूठ तो बिकता है हर गलियों में ।पर सच को कौन खरीद पाता है।।यह तो सुना था इंसान इंसान के काम आता है।पर यहां तो इंसान ही इंसान को गिराता है।।कुछ भी नामुमकिन नहीं इस दुनिया में।पर मां बाप का क़र्ज़ कौन अदा कर पाता है।।हर कोई दुखी है जीवन में।पर दूसरों का दर्द कहां कोई समझ पाता है।।कुंवर शिवम वर्मा

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9 Comments

  1. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 20/05/2017
    • shivam verma shivam verma 20/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 20/05/2017
    • shivam verma shivam verma 20/05/2017
  3. C.M. Sharma babucm 20/05/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/05/2017
  6. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/05/2017

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