प्रेम-रंग………………कृष्ण सैनी

जुल्फे जब उसकी उड़ती काली…मदपुरित मदिरा सी भरती हरीयाली…आलिंगन और स्पर्श अलौकिक…तुच्छ न्यून और सुख भौतिक…ज्ञान. धर्म, मर्म, वह सब…दैनिक द्वंद मिटाती जैसे रब …शांति भाव दिखाती अधर-लाली…जुल्फे जब उसकी उड़ती काली…मदपुरित मदिरा सी भरती हरीयाली…

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/05/2017
    • कृष्ण सैनी 18/05/2017
  2. bindeshwar prasad sharma 18/05/2017
    • कृष्ण सैनी 18/05/2017
  3. कृष्ण सैनी 18/05/2017
  4. डी. के. निवातिया 18/05/2017
  5. babucm 19/05/2017
  6. Madhu tiwari 19/05/2017
  7. MANOJ KUMAR 20/05/2017

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