रब की अनुपम सौगात

रब की अनुपम सौगात

सुविचारों को धारण किए, सौम्य आपकी काया हैमुख-मण्डल की शोभा सौम्य‍, सौम्य आपका साया हैशोभा सिर की बढा रहे ये काले श्यामल केशसौम्य आप पर लगता है पहनें जो भी वेशसौम्य विचार सुनने को उद्यत, कानों की सौम्यता क्या कहनाआभूषण विहीन भी लगते हैं सौम्य, बढाता सौन्दर्य कोई भी गहनालौंग तारा पहने नासिका, सुशोभित है चेहरे का भूगोलधीर-चंचल साम्य भाव समेटे, लगते सौम्य ये कपोललब आपके मतवाले गुलाब की पंखुडियों से लगते हैंजब देती है मुस्कान, हृदय में सहस्र सुमन खिलते हैंसांवलेपन में भी होती सौम्यता, कहता आपका रूप हैआनन की छवि ऐसी दिखती जैसे शीतकाल की धूप हैज्यों सरोवर में सुशोभित सुगंधित दमकते सरोज हैत्यों आपके हृदय-सागर का सौन्दर्य समुन्नत उरोज हैकदली के तने से कोमल पांव, कदम्ब की टहनी से हाथ हैये कोरी कोमल हथेलियां तो, रब की अनुपम सौगात हैसंयमित चाल मध्यम कद, तन संतुलित आकार में ढला हैयोग आसन प्राणायाम लगता है इस तन पर ही फला हैसदा मन की बात कहता ‘गोपी’, आज तन की सौम्यता बताई हैतन मन वचन से सौम्य, आपकी सौम्यता हृदय में समाई है

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रामगोपाल सांखला ‘गोपी’

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14 Comments

  1. कृष्ण सैनी 18/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" 18/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  3. bindeshwar prasad sharma 18/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  4. डी. के. निवातिया 18/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  5. babucm 19/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  6. Madhu tiwari 19/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla 22/05/2017
  7. MANOJ KUMAR 20/05/2017
    • Ram Gopal Sankhla 22/05/2017

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