भीज गये सपने – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भीज गये सपने जब सपने आये ऑखों मेंतो नीन्द खुली थी रातों मेंवो सपना तो इक सपना थाजो भीज गये बरसातों में। इक भूल हुई जो प्यार कियाबिन समझे आंखे चार कियाबदले में दिल का दर्द दियाबिन मतलब ये कर्ज लिया। मतलब का यार याराना थापागल मजनू ये दिवाना थाअब छोड़ो भी इन भूलों कोबस देखो अपने उसूलों को। यह दुनिया इतनी जालिम हैजैसे कि उलझे गालिब है।यहॉ पग पग पर ही धोखा हैयहॉ किसको किसने रोका है। वह दिल में बसने आती हैपर मन को ड़ंस के जाती हैकुछ ऐसे भी मिल जाते हैंजीवन के फूल खिल आते हैं।  

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16 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 17/05/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
  3. डी. के. निवातिया 17/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
  4. raquimali 17/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
  5. Shishir "Madhukar" 17/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
  6. shikha nari 17/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
  7. babucm 17/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 17/05/2017
  8. Meena Bhardwaj 18/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 18/05/2017

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