कर्मयोगी नरेन्द्र

कर्मयोगी नरेन्द्र

गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय समारोह, हुआ सूर्यनगरी को नाजमहामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुआ यह काजअपने-अपने क्षेत्र में निपुण प्रतिभाओं का हुआ सम्मानइन्द्र राजा ने राजस्थान में छेड. रखी थी रिमझिम की तानसम्मानितों में होता है नरेन्द्र सिंह का एक नामजिसने अपना लिया है मेडता में मीरां का धामपत्रकारिता और पुरातत्वों की खोज का क्षेत्र लिया हैसोचता हूं यह व्यक्ति अपने लिए कब जिया हैअनवरत रहता है जो पौराणिक अवशेषों की खोज मेंगृहस्थ होकर भी जो जीता है फकीरों सी मौज मेंमीरां स्मारक का व्यवस्थापक बन, उठाया बीडा भारी हैचारभुजा की छत्रछाया में धरोहर संरक्षण का कर्म जारी हैयायावरों की तरह पठार मैदान धोरों की खाक छानता हैक्या है ऐतिहासिक पत्‍‍थरों की कीमत, यह भलीभांति जानता हैस्वामी विवेकानन्द व मोदी जी के हमनाम तुम होसतत कर्म करके भी नरेन्द्र गुमनाम तुम होगुमनाम को ईनाम देकर, पत्थरों में से हीरे को तराशा हैकाबिल व्यक्ति हो सम्मानित, यही सरकार से आशा हैसम्मानित हुए हैं आप, सीना हमारा चौडा हुआ हैआपके कर्मयोग ने इस हृदय को भीतर से छुआ हैकाम करो और नाम करो, रहे यही कर्मप्रधान भावनाएंआपके सम्मानित होने पर, हमारी हार्दिक शुभकामनाएं

(प्रिय मित्र श्री नरेन्द्र सिंह के 26 जनवरी 2017 को महामहिम राज्यपाल महोदय से सम्मानित होने पर रचित कविता)

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– रामगोपाल सांखला ‘गोपी’

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 17/05/2017
  2. babucm 17/05/2017

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