क्या शिकवा करूँ 

जब अपनों ने ही लूट लियाक्या शिकवा करूँ मैं ओरो पर।बाहर से प्यार जताते थेअंदर से नफ़रत जोरों पर।अरे मिल कर बात सुलझा लेतेना आती दरार इन रिश्तों पर।अरे कौन सी दुश्मनी निकालते होसच बताओं तुम इन किश्तों पर।

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8 Comments

  1. bindeshwar prasad sharma 16/05/2017
  2. MANOJ KUMAR 16/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI 16/05/2017
  4. Shishir "Madhukar" 17/05/2017
  5. babucm 17/05/2017
  6. डी. के. निवातिया 17/05/2017
  7. Sukhbir95 17/05/2017

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