वाह रे इंसान-Raquim Ali

…भाग -१…वाह रे इंसानकहां पहाड़-समंदर-गहरी खानछोटा-सा कद, पर लेता है सबको छानआकाश छू लेने का पाले रहता अरमान!प्रतिफल है उसकी प्रबल इच्छा-शक्ति कादुनिया भर का हर अद्भुत-नया साज-सामानतल्लीन-तपस्वी-तत्पर है, मेहनतकश है वहबढ़ाता है नित सुविधाएँ व मानवता का ज्ञान। * * * * * * * * * * * ** * * * * * …भाग-२…वाह रे इंसान चंचलयुक्त -चतुर है, स्थिर नहीं उसका ध्यान माल मिले जग भर का लगाता है दावं पर दावंयुक्ति लगाता है, मिले अपरमित मान- सम्मान।कुछ ही को छोड़, नहीं चाहता हर इंसान-‘सुखी-सम्पन्न रहें सब, सबका हो कल्याणसभी हैं एक, हिंदू, सिख, इसाई, मुसलमानसबका, मालिक सर्वशक्तिमान एक भगवान।’ * * * * * * * * * * * ** * * * * * भाग-३ वाह रे इंसानभूख दो रोटी कीकितना परेशान!काम ही कामसुबह से भाग-दौड़हो जाती शाम।अभी नहीं आरामनमक-तेल है लानाबीवी का फरमान।सुबह का बचपनदोपहर की जवानीशाम बुढ़ापे की कहानी! …र.अ. bsnl in

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11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  2. raquimali raquimali 16/05/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 16/05/2017
  4. vijay kumar singh 16/05/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 16/05/2017
  6. raquimali raquimali 16/05/2017
  7. C.M. Sharma babucm 16/05/2017
  8. raquimali raquimali 16/05/2017
  9. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/05/2017
  10. raquimali raquimali 17/05/2017
  11. Akhilesh Kumar Singh 09/02/2019

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