बेटी का सवाल -तुलसी कुमार

समझो ना पराया हमें,हम भी तो अपने हैं।यूँ ना हमसे मुँह मोड़ो,हमारे भी कुछ सपने हैं।क्या इतना बड़ा गुनाह है,इस दुनिया मे हमारा  आना,कुछ हमारे भी सवाल हैं ,जरा इनके जबाव तो देते जाना।जिसने आपको जन्म दिया,यो भी तो एक औरत है,फिर बेटी के जन्म से,इतनी क्यों नफरत है।क्या सिर्फ बेटो के सहारे,जीवन कट जायेगाजरा सोचो आपका नाना – नानी,बनने का सपना कैसे पूरा हो पायेगा।याद आयुंगी तब मैं,जब हमारी जरुरत आएगी,क्यों सताते हो बेटियों को,कभी सोचा है हमारे बिना,सृष्टि कैसे चल पायेगी।Tulsi kumar

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10 Comments

  1. babucm 16/05/2017
    • tulsi kumar 16/05/2017
  2. डी. के. निवातिया 16/05/2017
    • tulsi kumar 16/05/2017
  3. bindeshwar prasad sharma 16/05/2017
    • tulsi kumar 16/05/2017
  4. Shishir "Madhukar" 16/05/2017
  5. tulsi kumar 16/05/2017
  6. ANU MAHESHWARI 16/05/2017
    • tulsi kumar 16/05/2017

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