राजा राम मोहन राय- ऋषि के.सी.

नानी आज कोई कहानी सुनाओ,जिसमे में राजा आए,और नाहि रानी की बीती बताओं,नानी जरा मुस्कुराकर कह दो,गाथा वीर भरी |एक नारी समाज के रूढ़ि से डरी,देख आए जब प्यारे मोहन लाल,बालक को ना जाने, क्यों गुस्सा आया उस साल ?जिस वक़्त भाभी, थी आग में बैठी थी,भैया थे तब, परलोक सुधार,बता दो लोगो, तुमने बना दिए कौन से नियम-सार,ईश्वर की संतान, बनकर बैठ गए है, शैतान !ख़त्म करो, यह सती-प्रथा,जागो मिट्टी की मुहूर्त या जगा दो! उस भारत की फिर एक वीर कथा,आज भी तन का एक-एक लहू का कतरा,कहता! रहना तैयार सदा तुम नारी,न सहना खतरा,सारा जन, तुम्हे करते है, आज नमन ! इस धरती की दामन थामकर सो गए मोहन,यूँही लेते रहना, सदा तुम जनम,करता हूँ, मैं पुनः कोटि-कोटि नमन |-ऋषि के.सी.

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9 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 16/05/2017
    • Rishi kc 16/05/2017
    • Rishi K.C. 16/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/05/2017
  3. Manish 08/07/2017

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