कड़वा सच – अनु महेश्वरी

कल मातृ दिवस पे,फेसबुक और व्हाट्सप्प पे,माँ के लिए मीठे बोल और प्यार की,जो बारिष हो रही थी,उसे देख मन भर आया,केवल एक ही दिन,माँ को याद कर,उसके त्याग और परिश्रम पे,गाथा रचकर कुछ लोग अपने,फ़र्ज़ को क्यों भूल जाते है?काश उससे आधा भी, अगर,असल ज़िन्दगी में, दिख जाए,तो देश में चारो तरफ,जो वृद्धाश्रम खुले रहे है,सब पर ताले लग जाए| अनु महेश्वरीचेन्नई

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14 Comments

    • ANU MAHESHWARI 15/05/2017
  1. Meena Bhardwaj 15/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 15/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" 15/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 15/05/2017
  3. bindeshwar prasad sharma 15/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/05/2017
  4. MANOJ KUMAR 15/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 15/05/2017
  5. babucm 16/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/05/2017
  6. डी. के. निवातिया 16/05/2017
    • ANU MAHESHWARI 16/05/2017

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