माँ – शिशिर मधुकर

निरीह बच्चों को जो संसार में जीना सिखाती है खुदा के रूप में वो स्त्री ही तो बस माँ कहाती हैउसके धैर्य के आगे कभी कुछ टिक नहीं सकता खुशी देखो तो फूलों की वो जब हँस के बुलाती है मकां कितना भी ऊँचा हो पर मन ही नहीं लगतामगर मांओं से बात करके कभी इंसा नहीं थकताबड़ा हो जाए कोई इस जहाँ में चाहे जितना भी हर इंसान लेकिन बस यहाँ माँ के सामने झुकता शिशिर मधुकर

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16 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 14/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2017
  2. shikha nari 14/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2017
  3. bindeshwar prasad sharma 14/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2017
  4. MANOJ KUMAR 14/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2017
  5. Meena Bhardwaj 15/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 15/05/2017
  6. babucm 15/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 15/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 15/05/2017
  7. डी. के. निवातिया 16/05/2017
    • Shishir "Madhukar" 16/05/2017

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