कविता:– दगाबाज, अमन नैन

चाल मटकनी चाले इंद्र की कोई हूर थीसुंदर सोना रूप उसकाघमंड मे वह चुर थीमै गाता फिरता थाअफसाने उसके प्यार केवो कर गयी दगाबाजीउच्चे महल तेरेनिचे थे ढेरे हमारेकिसे दुआ मॉगते हमारे लिएरब भी हो गया तुम्हाराआसू बनके खून निकलेनिकले खून पानीजिंदगी को कर गयी बर्बादये महला वाली रानीफिरते हूँअकेला वोशहर तेरे मे मरजानीतुझे ले गये गैरमै देखता रहा गयाउल्फत के राहो मेकाँटे बिछे पडे थेकरके विश्वास तुझपेघाव दिल पर अमन ने  झेले थे

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7 Comments

    • Aman Nain 13/05/2017
  1. bindeshwar prasad sharma 13/05/2017
    • Aman Nain 13/05/2017
  2. MANOJ KUMAR 13/05/2017
    • Aman Nain 13/05/2017
  3. babucm 15/05/2017

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