तयाग और बलिदान

मॅा तुम कभी नीम तो कभी शहद बनी और जरुरत पड़ने पर तुम पावर हाउस की सरकिट बनी ।जब तुम नीम बनी तो कठिन राहो पर चलना सिखाया ,जब तुम शहद बनी तो दुखी होने पर दुलराया जब तुम पावर हाउस की सरकिट बनी तो थके होने पर हौसला दिया ।माॅ तुम कभी तयाग बलिदान की प्रतिमुरती बनी तो कभी नमक भर झूठ बोल सपनों को सकार किया माॅ तुम कभी शब्द अनुभूति आचरण बनी ,तो कभी पिता बहन दोस्त बन सहारा दिया ।ा

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8 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/05/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 11/06/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 13/05/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 11/06/2017
  3. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 13/05/2017
  4. C.M. Sharma babucm 13/05/2017
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 11/06/2017

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