जब जब महकती ये यादें तुम्हारी हैं- आशीष अवस्थी

अब मिलता नहीं, जो आंसू छुपा के रखा था कहींना ही वो जिंदगी जो तन्हा गुज़ारी हैना ही वो बातें जो तुम करती थी कभीना ही वो सपने जो तुमने दिखाए थेना ही वो बारिश जिसमे भीगे थे साथना ही वो खत जो तुमने छुपाये थेना वो ही वो ख़्वाब जो छत में टहलते थेना ही वो रातें जो जागते गुज़ारी हैना ही वो वक़्त जो गुजरा था बाँहों मेंना ही वो फूल जो बिछे थे राहों मेंना ही वो रास्ता जिससे गुजरते थे हमना ही वो दिन जब आयी थी पनाहों मेंना ही वो बादल ,घटा, सावन, वो बूंदेना ही वो जुल्फें जो उलझी तुम्हारी हैंघूमता हूँ कभी जब उस पुरानी सड़क पेकुछ सतरंगी कुछ स्याह रंगो के साथमहकता रहता हूँ याद करके मैं भीजब जब महकती ये यादें तुम्हारी हैं

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 10/05/2017
    • Ashish Awasthi 11/05/2017
  2. bhupendradave 10/05/2017
  3. babucm 11/05/2017
  4. MANOJ KUMAR 11/05/2017

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