तुमको याद किया करता हूँ

मैं तुमको याद किया करता हूँ।। जब सागर पर किश्ती होतीऊँची  ऊँची  लहरें  उठतीऔर  दूर से  आँधी आकरउसे निगलने  खूब मचलती बैठ किनारे बाट जोहतावह मैं हूँया हो मेरा अपना कोईतब तुमको याद किया करता हूँ।। जब जर-जर कुटिया के अंदरप्यारा  नन्हा  सोया  हो  तोबाहर  भीड़ लगी हो  जिसकेभीतर  सब  कुछ  जलता हो लौट रहा हो उस कुटिया मेंवह मैं हूँया हो मेरा अपना कोईतब तुमको याद किया करता हूँ।। लाशें लाखों  सड़कों  पर होंचहूँ ओर  बस  सन्नाटा  होउन चिथड़ों को उलट-पलटकरया  पास  उसी  के  बैठा हो सिसक सिसककर रो पड़ता होवह मैं हूँया हो मेरा अपना कोईतब तुमको याद किया करता हूँ।। धरती के  कंपन के  कारणघर  बाहर कुहराम मचा होतब  मलवे के  नीचे  कोईतड़प रहा हो, चीख रहा हो उसे बचाने बेचैन बनावह मैं हूँया हो मेरा अपना कोईतब तुमको याद किया करता हूँ।। सरहद  पर  जो  सीना तानेदुश्मन को  ललकार  उठा होलड़ते  लड़ते  जख्मी  होकरअंतिम क्षण तक खूब लड़ा हो उसकी अर्थी लेने आयेवह मैं हूँया हो मेरा अपना कोईतब तुमको याद किया करता हूँ।। मैं  तुमको याद किया करता हूँ।।—-      ——-     —-      भूपेंद्र कुमार दवे                     00000

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. Ashish Awasthi Ashish Awasthi 10/05/2017
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 11/05/2017
  3. C.M. Sharma babucm 11/05/2017

Leave a Reply