अनोखी दोस्ती By Alok Upadhyay

अपनी ही बात पे खिलखिलाएँ जो तूंआखें भर आएं मेरी ,औरइतनी सी बात पे मुंह फुलाए जो तूंहोठों पे आएं हँसी…या तो बाते अजीब है मेरी ,या दोस्ती अनोखी है तेरी ..!मेरी अजीब बातो कोबस तू ही है समझ पाती,मेरी ही बातो पे नाराज होतीमेरी ही बातो पे खिलखिलाती …सच मेंया तो बाते अजीब है मेरी ,या दोस्ती अनोखी है तेरी ..!मैं तेरा मज़ाक बनाऊतू मेरा मज़ाक उड़ाती ,मुझ देख कर मुँह बनायेमुझे ही देख मुस्कुराती .,बड़ा प्यारा लगता हैतेरा गुप्ता होना .,मेरी बातो पे हँसानामेरी बातो पे रोना ..!क्यूंकिया तो बाते अजीब है मेरी ,या दोस्ती अनोखी है तेरी ..!

Famous Poet Alok Upadhyay With His God Gifted Friend Nikita Gupta

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3 Comments

  1. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 10/05/2017
  2. C.M. Sharma babucm 11/05/2017

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