और वो मुकर गए

कभी कहते नहीं थकते थे ,की हम अपने है .वक्त बदला तो खुद भी ,बदलकर वो मुकर गए.हमसे उनकी और उनकी हमसे ,महफिले सजती रही.आज मुझे मेरी महफ़िल में ,अकेला कर के मुकर गए.हर खताओ में हमसे ,बड़े रहे वो ,आज सारी सजाओ का बोझ ,मेरे सिराहने रख कर मुकर गए .निभाते रहे हम उनकी ,हर कसमो का बोझ ,आज बिना देखें मेरे आंसुओ को ,वो मुकर गए .                      वो मुकर गए ..anjali yadav

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5 Comments

  1. bindeshwar prasad sharma 06/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI 06/05/2017
  3. Shishir "Madhukar" 07/05/2017
  4. babucm 07/05/2017
  5. MANOJ KUMAR 08/05/2017

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