क़ब्र की मिट्टी

क़ब्र की मिट्टीमौत का मातम तोछाया है इस कदर कीख़ुशी को पनाह ना मिल पाएआस-पास तो ढूंढते हैंहम दर्द मेरेकही क़ब्र की मिट्टी ना उठा ले जायेउनकी आँखों की नमी ने भी बताया हैंगम का मातम उनपर भी छाया हैदीदार तो ना हो सका उनकाआख़िर दीदार पे तो कब्र पे ही आया हैंगम की दरिया मे डूब केआँसुओ के धार पे ना आये कोईओ क़ब्र के पहरे-दारोहम तो रोते रह गए बसहमारी क़ब्र को रोकर ना भिंगाओ कोईमिट्टी की तो काया थीमिट्टी मे मिल गईजिंदगी दिली भी दज हो गई कफ़न मेंबस हमारे प्यार का नानिंदिया मिला जाये कोई~मु.जुबेर हुसैन

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4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 06/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 07/05/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/05/2017
    • md. juber husain md. juber husain 07/05/2017

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