कविता :– खेल तकदीर का, अमन नैन

खेल देख कैसे तकदीर ने है खेले इंसान को इंसान सेहै लडा रहीकभी पैसे के लिए तोकभी स्वाभिमान के लिएकभी दिये इसे रंग जात को तोकभी दिया रंग धर्म काकभी गरीबो कोलडाया अमीरो सेतो कभी गरीबो कोझुकाया अमीरो के आगेकभी जमीन के लिएलडाया भाईयो कोतो कभी स्वार्थ के लिएमिलाया दुश्मन कोकभी राजा कोमाटी मे मिलायातो कभी कंगाल कोहीरे जवारात से जडाअमन मत रो किस्मत कोतू बदल अपनी तकदीर को

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/05/2017
  2. babucm 06/05/2017
  3. डी. के. निवातिया 06/05/2017
  4. MANOJ KUMAR 08/05/2017

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