अमानुश से मानुश – बी पी शर्मा बिन्दु

  चोर उचक्का पाकेटमारठग लूटेरा बेईमान।अपहरण ड़ाका कत्लेआमघूस खोरी सरेआम।हवाला घोटाला बाप से बापक्यों करता है ऐसा पाप।हेरा फेरी जालसाजतस्करी क्यों बढ़ रहा आज।मानुश क्यों बन रहा अमानुशरिष्ते को क्यों ठग रहा मानुश।सन्यासी बाबा भ्रश्ट बन रहेलोगों के लिए कश्ट बन रहे।बलत्कार एक ऑख मिचौलीनीयत जिसकी जब है डोली।जीवन को क्यों करता बेकारसपना कैसे होगा साकार।आज बचे कल होगा जेलजिंदगी तेरा खतम है खेल।मुॅह काला फिर होगा तेरागीदड़ बन जाओगे षेरा।थू थू देख करेगें लोगसुख नहीं पाओगे भोग।जीवन होगा नरक से बत्तरछोड़ दो ये सारे लत्तर।पाप का भागी कुल परिवारजैसे कटती गर्दन तलवार।बच्चे सारे होंगे गुणवाणमॉ बाप जब देंगे ध्यान।अच्छा उनको राह दिखाओअच्छी बात उनको सिखलाओ।संस्कारी अच्छा समाज बनेगाअच्छा एक इंसान बनेगा।माया मोह अब अलग ही रखनालोभ क्रोध का स्वाद न चखना।स्वर्ग से सुंदर जीवन होगाखुसबु प्रेम रस चंदन होगा।धर्म कर्म है तेरा साथीजैसे मस्त रहे वण हाथी।बड़ो का आदर सत्याकारभूलो किसी का नहीं उपकार।बिन्दु करता सबसे प्यारयहीं है मेरा अपना उपहार। बी पी शर्मा  बिन्दु

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10 Comments

  1. डी. के. निवातिया 05/05/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" 05/05/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
  3. babucm 05/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 06/05/2017
  4. ANU MAHESHWARI 05/05/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 06/05/2017
  5. bindeshwar prasad sharma 05/05/2017

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